सुप्रीम कोर्ट एक सुप्रीम भगवान फॉर हिंदुस्तान ? वो दुनियाकी अरे इस देशकी जड़ीबूटी जो हर मार्जकी दवाका लायसन्स रखती है ?और हर अपनेवालोका घढ़ है
उन पर कोई देशवासी कोई सांसद कोई नेता कोई उच्च पद पर बैठा प्रधान मंत्री ,राजयपाल या राष्ट्रपति ,लोकशाभा राज्य सभा ऊँगली नहीं उठा शकता ?
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उनकी किसी भी मन मानी हो या ऐयासी हो या लूट टूट फाट डकैती या असामाजिक
कृत्य हो अनीति हो हिटलरगिरि हो या दुनियाका कुछ भी खेल हो फिर भी उन पर
ऊँगली नहीं उठाई जाती ? न्यायके नामसे असिलको धोखा धड़ी हो असील पढ़ी दर
पढ़ी न्यायके लिए अपने जीवन खफा किया हो और अपने वारसॉ को भी अपने किसके लिया कोर्टके चक्क्र पर चक्क्र खा खा के जीवन बर्बाद किये जाते हो फिर भी उन पर ऊँगली नहीं उठाई जाती ? असील को अपने न्यायको देते देते कितने भी
जजिस रिटायर हो जाते हो और आरामसे अपनी निवृत्तिका आनंद लेते है फिर भी
असील अपनी जिंदगी बर्बाद करके न्याय पालिकाके चक्क्रर काटता ही रहता है ?
उसके केस दरमियान उसको कई जजोके मुख देस्खने पड़ते हो और सलामी भर भर के बिचारा अपने न्यायकि उम्मीद पाले हुए जिंदगी बसर करते करते श्मशानमें
प्रयाण कर जाता है ? लेकिन न्यायकि कोई गुंजाइस नहीं होती ? ऐसे हमारे मि, लोरडोका खेल है ? उनको सरकारी हर सुविधामें कोई कचास अगर रह जाती ही तो
पूरी सरकारी व्यवस्थाको बदनाम करके अपनी सुविधाको पहले निभानेका हुक्म देते है ? वाह रे मि. लॉर्डो वाह ? क्यों न इस ऑर्गेनिज़शन को बांध किया जाय ? और
हर समाज ,हर ज्ञाति ,हर व्यपारिक महाजन ,हर एनजीओ ,हर एसोशियेंन हर सोसाइटी हर गांव हर शहर नगपालिकाको हर सरकारी खेत्रको अपने अपने दायरें
नक्की किये जाय और उन पर सरकारी और लोशाहीसे चुने हुए हर नेता ही उनका
नेतृत्व नियभाये ? और इस तरह ये न्यायकि पद्धतिका वि केन्द्री कारण किया जाय
न्ययपालिकाका पावरको ऐसे हर क्षेत्रमे बाँट दिया जाय तभी जाके लोगोको जल्दी
जल्दी अपने अपने लड़ाई जगडे या कोई अन्यायका जल्दी निकाल आएगा और कोई
ऐसी ऐयासीयो नहीं कर पायेगा ? मोटर गाडी बँगला सरकारी सुविधाए और जोहुकमी और अपनी अपनी मन मानी पे रोक लगेगा ? न्यायकि किताबे हर क्षेत्रको
हर भाषामे उप्लभ्द की जानी होगी ? लोग अपने अपने न्यायका खुद ही समझेंगे और
छोटा समूह होनेसे लोगोको अन्याय करते अपना मुँह छिपानेको या शर्म महसूस होगी ताकि अन्याय असत्य असामाजिक या कोई को कर्म करनेसे डरेगा ? अपने
समाज कुटुंब की इज्जत बनाने और बचानेको इंसान सुधरेगा ? और सोचेगा
जिस तरह हर कुटुंब अपने कुटुंब की लाज मर्यादा रखनेकी कोशिश करता है ?
और सरकारी खर्चे मकाने नौकर चाकर बिल्डिंगे उनकी ऐयासियोका अंत होगा ?
जय हिन्द जय माँ भारती ये मेरे अपने विचार है किसीको बन्धकर्ता नहीं है
===प्रहलादभाई प्रजापति ,, २५/४/२०२५
===@praheladprajapati4411 ,,,,,
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