Friday, 18 April 2025

 कोई मेरे घरमे के घरके बाहर नोटोके बोरे क्यों नहीं रखता? और जजिस के वहा रखता है ? फिर भी जजिस छुट्टा घूमता है और सरकारी नौकरी भी करता है ?

पैसोंकी पहचान यहाँ करता मुहोब्बत कोई नहीं बचके निकल जा इस धरतीसे करता मुहोब्बत कोई नहीं ? (सुप्रीम कोठा अपनी औखात बाहर ? )

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न्यायपालिकामे न्याय देते देते कई जजिस अपनी सेलेरी खा खा के रिटायर हो गए और अब पेंशन पर आरामसे जिंदगी बसर करते है कई जजिस शायद दुनियासे चले भी गए होंगे ? लेकिन न्याय लेनेवाला अभी तक न्यायालयकी सीढ़ियों चढ़ उत्तर रहे है और न्यायकि आशामे अपनी ज़िंगगी और परिवारकी जिंदगी बर्बाद कर चुके है

फिर भी न्याय नहीं मिला ? यहाँ न्याय मूर्तियोंकी सुख सुविधाके लिए एक बड़ा ऑर्गेनिज़शन है जिसे हम न्यायालय कहते है ?न्यायका मजाक करनेकी जगा ?

जजिसकी कोई जिम्मेदारी नहीं ? उनको कोई सवाल जवाब नहीं कर शकता ?

मई खुद २८ /३० सालोसे न्यायके मंदिरकी सीढ़ियों घिस रहा हु अब तक भी कोई

उम्मीद नहीं है ? मेरा केस चलाते चलाते कई जजिस रिटायर भी हो गए लेकिन उनकी सुख सुविधा सेलेरी पेंशन पे कोई कटौती नहीं हुई है ? न्यायालय आम जनता

के लिए नहीं बना ? बड़े बड़े व्यापारी नेतालोग आतंकवादी ,लुटेरे डकैत और सफेद

ठगोंके लिए शयद बना है ? हां एक बात जरूर है की आम जनताके लहू और उनके

पछीने की कमाई टेक्स के रूपमे लेके ये लोग अपनी ऐयासी और सुख सायबी अपने

परिवारके साथ मानते है ? उनके परिवारके सदस्य लड़का या लड़की विदेशोंमें पढ़ाई के लिए आरामसे जा शकते है और फिर यहाँ या विदेशमे अपनी जिंदगी

सुख सुविधाओंके साथ बसर करते है ? हिन्दुस्तानमें गरीबी ,दरिद्रता ,अज्ञानता

बिछड़ा पन एक मज़बूरी हो गयी है ? एक अभिशाप है ? लगभग भारतीय सांविधानिक पद बिकाऊ हो गया हो ऐसा लग रहा है ? न्याय भी ऐसा हो गया

जैसा लग रहा है ? नहीं तो बोरोमे जलती रुपयोंकी गाड़ियों कहा देखनेको मिलती ?

और विदेशोंमें सम्पत्तियो ,बेंकोमे खाते पढनेमे कहा मिलते ?

अपना केस लड़ते लड़ते वकीलो को फ़ीस देते जाओ और कई केसमे वकील फ़ीस

लैके दुसरो वकिलोको केस सोप देते है वहा भी फ़ीस देते जाओ न्यायकि उम्मीद में जिंदगी अपना परिवार बर्बाद करती जाओ

जय हिन्द जय माँ भारती

===प्रहलादभाई प्रजापति ,,,१७ /४/२०२५

===@praheladprajapati4411 ,,,,,

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