उच्च न्यायालयकी तिकड़म बाजी एक परिवारकी सेवा याचना ? या न्याय ?
================ देश के साथ धोखे बाजी ? उच्च न्यालय में नियुक्त जाजोकि कोई वास्तविक काबिलियतनहीं बल्कि एक परिवारकी प्रत्यक्ष या परोक्ष सेवा याचना और गुलामीका
अजोड़ नमूना है ? परिवार वादसे भरा पड़ा जजिसका जमावड़ा यानी देश की न्याय
पालिकाएँ ,जहा काबिलियत की कोई गुंजाइस नहीं जहा अधिकतर जजिस का रिस्ता
प्रत्यक्ष्य या परोक्ष किसी एक राज नेता या देश द्रोही परिवारसे रिस्ता मायने रखता है
उनको देशका सविधान कोई मायने नहीं रखता या उनको मानवाधिकार ,या देशकी
कोई आरक्षण निति मायने नहीं रखती है या देश की बिछड़ी गरीब दलित जन जाती
भी कोई मायने नहीं रखती है सिर्फ परिवार वादका रिस्ता , और वामी कामी इस्लामी
शक्ति ही मायने रखती है नीतिमत्ता, नियम ,राष्ट्रवाद ,कानून उनके लिए एक खिलौना
है सिर्फ उनका अपना ऑर्गेनिजेशनके रिश्ते ही काम करते है वाम पंथी वकील और
इस्लामिक संघठनोकी शक्ति ही मायने रखती है देश के प्रति और देशकी प्रजाके
प्रति व् राष्टवाद के प्रति उनकी अरुचि जग जाहिर है अधिकतर वकील और जजिस
वामपंथी और इस्लामिक विचार धारासे प्रेरित दीखते है उनके फैसले की हर कहानी
मेसे फलित होता दीखता है नहीतो राम जन्म भूमिके फैसलेको इतने बरसोतक इन्तजार
नहीं करना पड़ता ऐसे कई फैसले है जो देशको जोड़नेके बजाय तोड़ते है
और देश द्रोहियोको पनाह देते रहे है एक लहेरु परिवार जो अंग्रेजोंका छुपा एजंट
या अंग्रेजोंका वाइसरॉयकी तरह देश को बर्बाद करता रहा और देशका बटवारा
करके भी उसकी इस्लामिक निम्ब को यहाँ मजबूत करता रहा उसकी गंध तक
सनातनी समाजके आने नहीं दी इतने बरसो तक ये बताता है की जड़े कितनी
गहरी और मजबूत है देशको लूटने आये हुए डकैती आक्रांताओकी जड़े देशमें
फैली हुई है उसका ज्ञान अब देशको धीरे धीरे प्रतीत होते जा रहाः है अब भी
न्याय पालिका उसी ग्रसतीसे पीड़ा रही है कैंसरका उपचार जरुरी हो गया है
===प्रहलादभाई प्रजापति ,,,,,६ /१/२०२३
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