किसी सनातनी हिंदुने कही और जगह या कही अन्य देशमे जाकरके वहाके लोगोको
अनैतिकतासे या जोर जुलमसे या किसी साजिसके तहत अपने धर्म में कन्वर्ट करनेकी कभी कोशिश की है क्या ?
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लेकिन बाहरसे आये हुए इस धरती के यानी यहके लोगोको
उनके मजहब या धर्ममे कन्वर्ट करनेकी पूरी कोशिश की है वो भी अनैतिकतासे जोर
जुलमसे और कई साजिसके तहत लोगोको गुमराह करके या लोगोको उनकी अपनी
मजबूरियोका फायदा उठाके दराके धमकाके या प्रेमकी लव की जिहादिसे कई अनैतिकताकी साजिसे रेचके यहाके लोगोको कन्वर्ट करनेकी भरपूर कोशिशे की है
और उनमे वो लोग सक्सेस भी हुए है फिर भी जो बचे कूचे लोग है जो अपनी असलियतका जानकी बाजी लगाके बचाये राखी है ऐसे कई महापुरुष संत साधु
शूरवीर योधाऐ शूरवीर राजाए और कई बुद्धिजीविओने हिन्दू सनातनिको बचाये राखी है
अब भी लोग ज्यादातर जागृत हुए है और अपने धर्म अपनी परम्पराए अपने पुर्खोका
इतियास को बचने में लोग जागृत हुए है और इन बाहरी लोगोकी साजिसे समज गए है
कई आक्रांता यहाँ अपना हड्डा जमाके कई लोगोको सत्ता संपत्तिकी लालचमें रखके उनको अपना गुलाम बनाये रखा है ऐसे लोग जो क्रिश्तो क्रिचियाँन ,इस्लामिक, वामी
कामी लोग है हमारे हिन्दू सनातनियोकि सहिष्णुताका बडप्पनका इन्सनियतका और
वसुधैवकी की भावनाओंका लाभ उठाके लोगोके साथ छेतरपिंडी की है और उनका
मकसद सिद्ध किया है जॉन मेकालेका और मुगलोंका वर्साई खड़ा किया है ये सभी
आक्रांता लोग है विदेशी है जो यहाकि मिट्टीको नहीं जानते या मानते है और इस मिट्टीको कभी मानसम्मान नहीं देते है ऐसे लोगको पहचाने और उनको उनकी
भाषामेही जवाब देना होगा ऐसे हमारे लोग जो स्वार्थी सत्तालोलुप संपत्ति लोलुप है
उनको भी पहचाने और अपनी पुरातनी सखावत हिन्दू सनातनी संस्कृतिको अपनी
वैदिक संस्कृति को अपने ऋषिमुनियोंकी परम्पराको अपने रीती रिवाजोको बचाये
रखना होगा अपने स्वावलम्बी जीवनको शैलीको जीवित रखनी होगी अपनी हैसियत
को कभी भी गिरवी नहीं रखनी होगी किसीके लालच लोभ या परवलम्बी नहीं होना
होगा हमारे पुर्खोकी संयुक्त कुटुम्ब्की भावनाको जीवित रखनी होगी विभक्त कुटुम्ब्का
अकेलापनकी भावनाको त्यागना होगा तभी जाके हमारी ऑरिजनलिटीको बचा शकते है जब इंसान बुड्ढा हो जाता है तो अकेला पन इन्सिक्युरिटी महसूस करता है और वो
दुखी होके कई बीमारियोसे जुजके जल्दी मर जाता है ये अकेलापनकी वृत्ति त्यागनी होगी जिस से वो समूहमे रहके किसी भी आक्रमण कारियोका सामना कर शकेगा
और अपनी उन्नति विकास और अपना धर्म अपनी संस्कृति बचा पायेगा
===प्रहलादभाई प्रजापति ,,, १६ /३/२०२५
===@praheladprajapati4411 ,,,,,
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